साल था 1990 का, उन दिनों राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था राम मंदिर आंदोलन में अपनी भागीदारी देने एक लड़का उत्तराखंड से अयोध्या पहुँचा था..नाम था अजय बिस्ट ....इसी दौरान उसकी मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्धनाथ से होती है. और रातों-रात बिना किसी को बताए वो बच्चा नाथ सम्प्रदाय की दीक्षा ले ले लेता है. और अजय बिस्ट से योगी आदित्यनाथ बन जाता है.
योगी आदित्यनाथ नाथ बीजेपी का एक बड़ा चेहरा हैं. पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बाद पार्टी के सबसे कद्दावर नेता सीएम योगी ही हैं.
पांच जून 1972 को एक साधारण परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने तक की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही. आदित्यनाथ ने पहले परिवार को छोड़कर संत बने लेकिन फिर राजनीति से कैसे मोह हुआ..और कैसे 26 साल की उम्र में ही सांसद बन गए..इसके पीछे की कहानी आपको बताएंगे..
बात दो दशक पहले की है. गोरखपुर शहर के मुख्य बाज़ार गोलघर में गोरखनाथ मंदिर से संचालित इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्र एक दुकान पर कपड़ा ख़रीदने आए और उनका दुकानदार से विवाद हो गया...छात्रों ने हमला करने पर दुकानदार रिवॉल्वर निकाल ली....इस घटना के दो दिन बाद दुकानदार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर एक युवा योगी छात्रों ने उग्र प्रदर्शन में शामिल हुआ और एसएसपी आवास की दीवार पर चढ़ गए.
दीवार पर चढ़ने वाला युवक कोई और नहीं योगी आदित्यनाथ थे...कुछ दिन पहले ही 15 फरवरी 1994 को नाथ संप्रदाय के सबसे प्रमुख मठ गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी के रूप में अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ से आदित्यनाथ ने दीक्षा ली थी...इस घटना के बाद गोरखपुर की राजनीति में योगी के रूप में एक 'एंग्री यंग मैन' की धमाकेदार एंट्री थी.
यह वही दौर था, जब गोरखपुर की राजनीति पर दो बाहुबली नेता... हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही की पकड़ कमज़ोर हो रही थी...युवाओं ख़ासकर गोरखपुर विश्वविद्यालय के सवर्ण छात्र नेता इस 'एंग्री यंग मैन' के साथ जुड़ते गए..गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने योगी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने के बाद योगी पहली बार 1998 में 26 साल कीउम्र में लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए.... जिस सीट से योगी ने चुनाव जीता उसी गोरखपुर सीट से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहे थे..
2002 में योगी आदित्यनाथ ने खुद की एक सेना तैयार की जिसका नाम रखा गया हिंदू युवा वाहिनी..यह संगठन हिंदू विरोधी, राष्ट्र विरोधी और माओवादी विरोधी गतिविधियों' को नियंत्रित करता है...हिंदू युवा वाहिनी के पर गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर से लेकर मउ, आज़मगढ़ तक मुसलमानों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के दर्जनों मामले दर्ज हैं.
ख़ुद योगी आदित्यनाथ पर भी हत्या के प्रयास, दंगा करने, सामाजिक सदभाव को नुक़सान पहुंचाने, दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने, धर्मस्थल को क्षति पहुंचाने जैसे आरोपों में तीन केस दर्ज हैं....
हिंदू युवा वाहिनी के इन कामों से गोरखपुर और आसपास के जिलों में योगी का दायरा बढ़ता गया और एक फायर ब्रांड हिंदू नेता की पहचान बन गई...हिंदू युवा वाहिनी ने योगी आदित्यनाथ के लिए वोट बटोरने का भी काम किया..इसका असर अगले चुनावों में दिखा.
लगातार पांच बार योगी ससद चुने गए और हर बार वोटों की गितनी बढ़ती गई...2014 के चुनाव को योगी ने 30 हजार से ज्यादा मतों से सांसदी का चुनाव जीता है..2014 में भाजपा की मोदी सरकार बनने के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी भाजपा ने अपना दायरा बढ़ाना शुरू किया...2017 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ को स्टार प्रचारक बनाया गया..इस दौरान योगी ने अपनी कट्टर हिंदूवादी छवि का फायदा उठाया जिसका फायदा भाजपा को भरपूर हुआ...


